क्या है ध्यान!! क्यों है जरूरी? पढे स्पेशल रिपोर्ट….

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दीपांशु श्रीवास्तव

ध्यान (Meditation):
योग विज्ञान में ध्यान का बहुत बड़ा महत्त्व है. बिना ध्यान के योग अधूरा है. ध्यान के माध्यम से हम अपने सम्पूर्ण जीवन को बदल सकते है. ध्यान जीवन के सारी समस्यायों का समाधान है. ध्यान का अभिप्राय है मौन होकर, स्वयं के भीतर की यात्रा करना और उस दिव्यशक्ति से साक्षात्कार करना जो हमारे भीतर है, जिसे हम परमात्मा कहते है. जब आत्मा व परमात्मा का मिलन होता है तो जीवन पूर्ण हो जाता है फिर मनुष्य सुख दुःख की चिंताओं से दूर परमात्मालीन अवस्था में जीवन के आनंद को भोगता है. आइए जाने आखिर क्या है ध्यान और ध्यान में एकाग्र होने के सरल तरीके:
ध्यान एक योग विधि है जिसके माध्यम से आप प्रकृति से, ब्रह्माण्ड की शक्तियों से जुड़ जाते है. ध्यान व्यक्ति के व्यक्तित्व का विकास करता है, उसकी जीने के तरीके को बदल देता है, उसे सफल बनाता है. एक ऐसी विधि जिसमें आत्मा को परमात्मा से जुड़ने के लिए कोई कर्मकांड की जरूरत नहीं है. आदियोगी शिव को ध्यान का प्रतीक माना गया है.

कुछ योगियों, साधकों द्वारा ध्यान लगाने का अर्थ ये बताया गया कि पद्मासन या सुखासन में बैठकर बिल्कुल निर्विचार हो जाओ, अपनी सांसों पर ध्यान दो और कुछ भी ना सोचों. कुछ हद तक तो सही लेकिन क्या आपको लगता है कि आप अपने मन पर काबू कर लिए है अथवा आपका मन कुछ सोचता ही नहीं है. ऐसा होना आज के युग में विशेषकर डिजिटल क्रांति वाले युवाओं के साथ तो बेहद मुश्किल प्रतीत होता है…तो क्यों न कुछ अलग तरीके से सोचें.
आज हर मनुष्य अपने विचिलत मन और अपने जीवन के विभिन्न संबंधों, स्वास्थ्य, करियर को लेकर परेशान है. एक परेशानी खत्म नहीं होती कि दूसरी सामने आ जाती…तो चलिए मुद्दे पर आते है. ध्यान करने से पूर्व कुछ बातों का विशेष ध्यान दें जैसे:-
• ध्यान एक निश्चित स्थान पर, निश्चित समय पर होना चाहिए (ब्रह्म मूहर्त में हो तो अति उत्तम)
• ध्यान करने से पूर्व स्नान जरूर कर लेना चाहिए.
• ध्यान करने से पूर्व योग प्राणायाम जरूर करें.
प्राणायाम (Breathing Techniques):
प्राणायाम अर्थात प्राणों (प्राणवायु) को आयाम देना. इनमें मुख्यतः भ्रस्तिका प्राणायाम जिसमें आपको सुखासन या पद्मासन में बैठकर गहरी और लम्बी साँस लेना होता है. तत्पश्चात अनुलोम विलोम प्राणायाम करें जिसमे आप एक नासिका से स्वास को भीतर ले तथा दूसरी से छोड़े इस प्रकार बायें नासिका से ले और दूसरी अर्थात दायीं नासिका से छोड़े. ध्यान रहे यह क्रिया आराम से करना है. प्राणवायु जब भीतर जाये तब आप उसे महसूस करे, उसपर ध्यान दे, इसके बाद आपको कपालभाति प्राणायाम करना है जिसमे आप सुखासन या पद्मासन में बैठकर अपनी नाक से सांस को जोर से बाहर इस प्रकार छोड़े जैसे आप अपने नाक के सामने किसी दीपक के लौह को अपनी साँस से बुझा रहे हो. इस क्रिया को करते समय साँस बाहर जायेगा और आपका पेट अंदर की तरफ . प्रत्येक योग साधक को उपरोक्त प्राणायाम, ध्यान से पहले कम से कम 5 मिनट तक करना चाहिए जिससे शरीर में आंतरिक तनाव कम हो, तथा आप अच्छा महसूस करे.
ध्यान के तीन आयाम: 1. प्रार्थना ध्यान 2. आभार ध्यान 3. अनन्त ध्यान
प्रार्थना ध्यान (Prayer Meditation): इस विधि में आप पद्मासन या सुखासन में एक उपयुक्त शांत जगह पर बैठ जाएं . ॐ का तीन बार उच्चारण करें. फिर अपनी आती-जाती सांसों पर ध्यान दें. निश्चित तौर पर इस दौरान आपके मन में कई विचार आएंगे जिससे आप भागते रहे है, कई नकारात्मक बातें भी आ सकती है. आप विचारों को आने दें और जानें दें उनसे उलझे नहीं. अब आप अपने इष्ट देवता का ध्यान करते हुए उनसे सारी बातें अपने प्रार्थना के माध्यम से कहें. यदि आपका बुरा समय चल रहा है या कोई विघ्न बाधा है तो परमात्मा से बल, विधा, बुद्धि व शक्ति मांगे तथा आपसे जाने अंजाने में कोई भूल / गलती हो गई हो जिससे किसी का दिल दुखा हो तो परमात्मा से अपनी गलतियों के लिए सच्चे दिल से माफ़ी मांग लें. सच्चे मन से और पूर्ण विश्वास से प्रार्थना करने पर परमात्मा हमें जरूर सुनता है.
आभार ध्यान (Gratitude Meditation): हम परमात्मा / प्रकृति से तो बहुत कुछ मांगते है और परमात्मा हमें जो हमारे लिए उचित रहता है उचित समय पर दे भी देता है लेकिन जब हमारी मनोकामना पूर्ण हो जाती है तो हम परमात्मा का आभार प्रकट करना भूल जाते हैं. जब कभी भी आपकी इच्छाएं पूर्ण हो जाए या कोई बिगड़ा काम बन जाएं तो परमात्मा का आभार ध्यान के माध्यम से जरूर करना चाहिए. उपरोक्त दिए गए ध्यान विधि के अनुसार ध्यान लगाकर अपने इष्टदेव को धन्यवाद जरूर कहें. निश्चित रूप से मन को शांति मिलेगा.
अनन्त ध्यान (Endless Meditation): जब आप उपरोक्त ध्यान विधियों के माध्यम से अपनी परेशानियों, चिंताओं से मुक्त हो जाते है तो आपका मन शांत होने लगता है. अब आपका शरीर व मन अनन्त ध्यान के लिए परिपक्व हो जाता है जिससे आप निर्विचार अथवा बिना किसी विचार के ध्यान के माध्यम से परमात्मा / दिव्य शक्ति से जुड़ जाते है. इस विधि में पद्मासन/सुखासन में बैठ कर अपनी सांसों पर ध्यान केंद्रित करना होता है फिर सांसें धीरे धीरे छोटी होने लगती है और आप एक अनोखे सफर की ओर चल पड़ते है.
नोट: ध्यान के आध्यात्मिक सफर पर आपको विशेष अनुभव होगा, घबराएं नहीं और ना ही इस अनुभव को किसी से सांझा करें. समय के साथ आप प्रकृति से जुड़ कर जीवन को एक अलग नजरिए से देखने लगेंगे. प्रथम दो ध्यान विधि में आप महामृत्युंजय मंत्र, गायत्री महामंत्र, ॐ का उच्चारण या ऑडियो गीत के रूप में सुनकर भी ध्यान कर सकते है. नए योग साधकों के लिए यह लाभदायक सिद्ध होता है.

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