क्या है गिलोय ! आइए जानते है योग के साथ आयुर्वेद को सहेज रहे है योगाचार्य यतेंद्र सागर विश्वकर्मा से

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संतोष फोटोजर्नलिस्ट

💐एक नाम सौ काम- गिलोय 💐👍👌

संघर्षों में था सफर, जिंदगी जीने लगे थे, सफर रुकने लगा इस कदर की, कंधों पर तेरे लट की औषधि लिए चल दिये–!

कोरोना काल मे आयुर्वेद का सबसे फेमस नाम गिलोय- गुडूची या अमृता कह सकते है आप–!

आयुर्वेद के अनुसार गिलोय की बेल(लट) जिस पेड़ पर चढ़ती है उसके गुणों को भी अपने अंदर समाहित कर लेती है, इसलिए नीम के पेड़ पर चढ़ी गिलोय की लट को औषधि के लिहाज से सर्वोत्तम माना जाता है। इसे नीम गिलोय के नाम से जाना जाता है–!

देवरिया जिले का एक ऐसा व्यक्ति जो साधारण होते हुए भी एक ज्ञान की गंगा लिए निकल पड़े हैं नाम है योगाचार्य यतेंद्र सागर विश्वकर्मा जो गौरी बाजार के रहने वाले हैं और ये सहायक योग प्रशिक्षण के पद पर गरेड देवरिया में कार्यरत है, आये दिन कही न कही योग सिखाते हम सभी के बीच मिल जायेगे, जिनसे मिलने के बाद आप भी मोहित हो जायेगे, इनका स्वभाव ,मधुर बोली के साथ आयुर्वेद व योग की ज्ञान गंगा लिए एक अलग पहचान के साथ जीने का हुनर रखने वाले व्यक्तियों में से एक है योगाचार्य जी–!

ये अपने कंधों पर गिलोय लिए हुए– आइये बताता हूं गिलोय की खायसियत–👇

पिछले दिनों जब स्वाइन फ्लू का प्रकोप बढ़ा तो आयुर्वेद में गिलोय का नाम खासा चर्चा में आया। गिलोय या गुडुची, जिसका वैज्ञानिक नाम टीनोस्पोरा कोर्डीफोलिया है, का आयुर्वेद में एक महत्वपूर्ण स्थान है। इसके खास गुणों के कारण इसे अमृत के समान समझा जाता है और इसी कारण इसे अमृता भी कहा जाता है।

आप को बता दे कि गिलोय की पत्तियों और तनों से सत्व निकालकर दोनों इस्तेमाल में लाया जाता है। गिलोय को आयुर्वेद में गर्म तासीर का माना जाता है। यह तैलीय होने के साथ- साथ स्वाद में कडवा और हल्की झनझनाहट लाने वाला होता है।

और सबसे खास बात गिलोय के गुणों की संख्या काफी बड़ी है। इसमें सूजन कम करने, शुगर को नियंत्रित करने, गठिया रोग से लड़ने के अलावा शरीर शोधन के भी गुण होते हैं। गिलोय के इस्तेमाल से सांस संबंधी रोग जैसे दमा और खांसी में फायदा होता है। इसे नीम और आंवला के साथ मिलाकर इस्तेमाल करने से त्वचा संबंधी रोग जैसे एग्जिमा और सोराइसिस दूर किए जा सकते हैं। इसे खून की कमी, पीलिया और कुष्ठ रोगों के इलाज में भी कारगर माना जाता है।

आयुर्वेद के हिसाब से गिलोय में इम्यूनिटी सिस्टम में सुधार आता है और शरीर में अतिआवश्यक सफेद सेल्स की कार्य करने की क्षमता बढ़ती है। यह शरीर के भीतर सफाई करके लीवर और किडनी के कार्य को सुचारु बनाता है। यह शरीर को बैक्टिरिया जनित रोगों से सुरक्षित रखता है। इसका उपयोग सेक्स संबंधी रोगों के इलाज में भी किया जाता है।

और आज कोरोना संक्रमण के दौरान लंबे समय से चलने वाले बुखार के इलाज में गिलोय काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह शरीर में ब्लड प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ाता है जिससे यह डेंगू तथा स्वाइन फ्लू के निदान पाए जा रहे है जो बहुत ही कारागार है। इसके दैनिक इस्तेमाल से मलेरिया के साथ साथ बहुत सारी बीमारियों से बचा जा सकता है। और अगर आप को ज्यादा कड़वा लगे तो गिलोय के चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर इस्तेमाल करने से इसकी छमता और बढ़ जाती है।

इस लिए आप सब अपने जीवन मे योग और आयुर्वेद को स्थान दीजिये और स्वस्थ और मस्त रहिये🙏💐

💐🙏धन्यवाद- संतोष विश्वकर्मा (फोटोजर्नलिस्ट देवरिया)🙏💐

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