यूपी पंचायत चुनाव : नई आरक्षण सूची से किसी के टूटेंगे सपने तो किसी की चमकेगी तकदीर

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देवरिया टाइम्स

प्रदेश सरकार ने उच्च न्यायालय के आदेश के मुताबिक 2015 को आधार मानते हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए नए सिरे से चक्रानुकम आरक्षण प्रक्रिया का बुधवार को निर्धारण कर दिया है। शासन ने जिला पंचायत अध्यक्षों की आरक्षण सूची जारी की है। किस जिले में कितनी क्षेत्र पंचायत किस श्रेणी के लिए आरक्षित होंगी, यह भी तय हो गया है। नया बदलाव होने से कुल 16 जिला पंचायत अध्यक्षों का आरक्षण बदल गया है। अनुसूचित जाति व अन्य पिछड़ा वर्ग सीटों का आरक्षण यथावत रहा। केवल महिला व अनारक्षित वर्ग में ही बदलाव हुआ है। इसके साथ ही ग्राम प्रधानों, ग्राम पंचायत सदस्यों के आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया तय कर दी है। 

पंचायतीराज विभाग ने आरक्षण निर्धारण का कार्यक्रम जारी किया है। सभी जिलाधिकारियों को 26 मार्च तक आरक्षण एवं आवंटन की अंतिम सूची का प्रकाशन कराना होगा। जिला पंचायत फीरोजाबाद, मैनपुरी, कासगंज, कन्नौज, मऊ, अमेठी सोनभद्र व हमीरपुर सीटें अब सामान्य से महिला वर्ग में आरक्षित हो गई हैं। वहीं अलीगढ़, आगरा, बलरामपुर, सुलतानपुर, शाहजहांपुर, मुरादबाद व बुलंदशहर महिला आरक्षण से निकलकर अनारक्षित हो गई हैं। अन्य जिला पंचायतों में पूर्व घोषित आरक्षण बना रहेगा। 26 मार्च को आरक्षण सूची के प्रकाशन के साथ ही राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव कार्यक्रम की अधिसूचना भी कर सकता है।

ग्राम प्रधान आरक्षण मेंं 60 फीसद तक बदलाव संभव : आरक्षण का नया फार्मूला लागू होने का सर्वाधिक प्रभाव ग्राम प्रधान पदों पर होने की संभावना है। माना जा रहा है कि 60 फीसद तक प्रधान पदों का आरक्षण बदल जाएगा। इसके अलावा क्षेत्र व जिला पंचायत सदस्यों के आरक्षण में 20 से 30 फीसद तक परिवर्तन का कयास लगाया जा रहा है। वार्ड आरक्षण इस संख्या के आधार पर नहीं, वरन क्षेत्र के आधार पर निर्धारित किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि सरकार ने गत 11 फरवरी को जारी शासनादेश के जरिए पंचायत चुनाव में चक्रानुक्रम लागू करते हुए उन पंचायतों को उस श्रेणी में आरक्षित करने के निर्देश दिए थे, जो अभी तक आरक्षित नहीं हुई थीं। यह आरक्षण वर्ष 1995 से 2015 तक संपन्न पंचायत चुनावों में हुए आरक्षण व आवंटन को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा था। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। हाईकोर्ट ने इस प्रक्रिया को रद करते हुए वर्ष 2015 को आधार मानकर आरक्षण तय करने के आदेश दिए थे। मंगलवार को योगी कैबिनेट ने हाईकोर्ट के आदेशानुसार पंचायत राज (स्थानों और पदों का आरक्षण और आवंटन) 12वें संशोधन को मंजूरी दे दी थी।

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