यूनिफार्म के लिए लाभार्थी के खाते में जायेगा धन

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बेसिक शिक्षा परिषद में आने वाले समय में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। वर्षों से चली आ रही विद्यालय स्तरीय ड्रेस खरीद एवं वितरण प्रक्रिया जल्द ही बंद की जा सकती है और इसकी जगह डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) मॉडयूल ले सकता है। राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय ने 15 जून को होने वाले प्रशिक्षण हेतु जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी/प्रभारी एवं जिला समन्वयक सामुदायिक सहभागिता को प्रेरणा पोर्टल पर दर्ज छात्र/छात्राओं के माता-पिता/अभिभावकों के शैक्षिक सत्र 2021-22 के अद्यतन एवं प्रामाणिक डाटा का PFMS DBT मॉड्यूल के माध्यम से एकाउंट वेलिडेशन करने हेतु प्रशिक्षण करने हेतु अपने स्तर से निर्देश देने के लिये कहा है।

2021-22 से लाभ देने की तैयारी, ड्रेस नहीं खरीदने पर किसकी होगी जिम्मेदारी संशय?

समग्र शिक्षा के अंतर्गत सत्र 2021-22 हेतु यूनिफार्म मद की धनराशि लाभार्थी के सीधे खाते में प्रेषित करने की योजना है। आपको बता दे कि पहले भी शिक्षक संगठनों ने मध्याह्न भोजन, ड्रेस-स्वेटर खरीद आदि से शिक्षकों को दूर रखने की मांग करता रहा है। आगे देखना यह भी दिलचस्प होगा कि क्या लाभार्थी के खाते में गये धन से ड्रेस खरीदा गया या नहीं? अगर नहीं तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?

डीबीटी मॉड्यूल लागू करना एक बहुत बड़ा कदम है। पहले प्रबंध समिति के खाते में धन आता था उसके बाद मानक के अनुसार प्रधानाध्यापक ड्रेस बनवाता था जिसकी जिला स्तरीय जांच समिति द्वारा किया जाता था। परंतु जब धन सीधे लाभार्थी के खाते में जायेगा तो ड्रेस न बनवाने पर किसकी जिम्मेदारी तय होगी?
विनोद कुमार सिंह
जिलाध्यक्ष
पूर्व मा0 शिक्षक संघ

इस योजना के लागू होने शिक्षकों पर दबाब कम होगा। लेकिन किसी भी कमी के लिए किसकी जिम्मेदारी होगी यह स्पष्ट नहीं है।हमारी मांग है कि शिक्षकों से लिये जाने वाले सभी गैर शैक्षणिक सभी कार्य बंद होने चाहिए।
अनिल कुमार भारती
जिलाध्यक्ष
उ0प्र0 प्राथमिक शिक्षक संघ

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