कृषकों की दुर्घटनावश मृत्यु/दिव्यांगता की स्थिति में आर्थिक सहायता के लिये संचालित है ‘‘मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना’’


देवरिया टाइम्स

जिलाधिकारी आशुतोष निरंजन ने बताया है कि कृषकों की दुर्घटनावश मृत्यु/दिव्यांगता की स्थिति में उनके परिवार को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना संचालित है। इसके अन्तर्गत कृषक की दुर्घटनावश मृत्युध्दिव्यांगता की दशा में अधिकतम 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जायेगी, जो राज्य सरकार द्वारा वहन की जायेगी। मृत्यु/दिव्यांगता की तिथि को 18 से 70 वर्ष तक की आयु वाले कृषक ही इस योजना से आच्छादित हो सकेगें।
जिलाधिकारी ने अनुमन्य आर्थिक सहायता के विवरण में बताया कि कृषक के मृत्यु अथवा पूर्ण शारीरिक अक्षमता, दोनो हाथ अथवा दोनो पैर अथवा दोनो आखों की क्षति की स्थिति में, एक हाथ तथा एक पैर की क्षति की स्थिति में सहायता धनराशि शत प्रतिशत देय होगी। एक हाथ या एक पैर या एक आंख की क्षति, स्थायी दिव्यांगता 50 प्रतिशत से अधिक होने पर, परन्तु 100 प्रतिशत से कम होने पर 50 प्रतिशत धनराशि का प्राविधान है। स्थायी दिव्यांगता 25 प्रतिशत से अधिक परन्तु 50 प्रतिशत से कम होने पर अनुमन्य धनराशि का 25 प्रतिशत की सहायता धनराशि दी जायेगी।


इसी प्रकार प्राकृतिक आपदा में मृत्यु की दशा में 4 लाख की धनराशि प्रदान की जाती है तथा 60 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता होने पर 2 लाख, 40 से 60 प्रतिशत की दशा में 59100 रुपये प्रति व्यक्ति राज्य आपदा मोचक निधि से प्राप्त होते है।

आवेदन की प्रक्रिया का स्वरुप एवं आवश्यक प्रपत्र
कृषक के दुर्घटनावश मृत्यु/दिव्यांगता की स्थिति में उसकी विधिक वारिस/वारिसों/स्वयं कृषक द्वारा आवेदन पत्र भरकर जिलाधिकारी को सम्बोधित करते हुए संबंधित तहसील में जमा किया जायेगा। मृत्य कृषक के एक से अधिक वारिस होने पर उनके द्वारा संयुक्त रुप से आवेदन किया जायेगा।
आवेदन के साथ यथा वांछित साक्ष्य खतौनी के प्रमाणित प्रति अथवा रजिस्टर्ड निजी पट्टेदार हेतु प्रस्तर-3(क) के अनुसार पट्टे की प्रमाणित प्रति अथवा बटाईदार हेतु प्रस्तर-3(ख) के अनुसार कोई एक प्रमाण पत्र संलग्न करना होगा।
आयु प्रमाण पत्र के लिये हाई स्कूल प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर की प्रति, वोटर आईडी कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेन्स, आधार कार्ड, पेन कार्ड में से किसी एक अभिलेख को प्रस्तुत करना होगा। निवास प्रमाण पत्र के रुप में पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेन्स, राशन कार्ड, वोटर आई डी, आधार कार्ड एवं उप जिलाधिकारी कार्यालय द्वारा जारी निवास प्रमाण पत्र में से किसी एक प्रपत्र को साक्ष्य के रुप में प्रस्तुत किया जाना होगा।
पोस्टमाटम रिपोर्ट अथवा जहां पर पोस्टमाटम संभव नही है वहां पंचनामा, मृत्यु प्रमाणपत्र, दिव्यांगता की स्थिति में सीएमओ द्वारा जारी प्रमाण पत्र, उत्तराधिकार प्रमाण पत्र (केवल विवादित उत्तराधिकार की दशा में), बैंक पासबुक की छाया प्रति, मोबाईल नम्बर एवं आधार नम्बर देना होगा।

आवेदन पत्र प्रस्तुत करने की अवधि
आवेदन पत्र निर्धारित प्रमाणपत्रो/प्रपत्रो को पूर्ण करा कर दो प्रतियो में मूल प्रति एवं छायाप्रति के साथ अधिकतम 1.5 माह(45 दिन) की अवधि में संबंधित तहसील कार्यालय में जमा करना होगा। अपरिहार्य परिस्थिति आवेदन पत्र प्रस्तुत करने की अवधि को एक माह तक बढाने का अधिकार जिलाधिकारी में निहित होगा।

आवेदन पत्र के निस्तारण की प्रक्रिया
आवेदन पत्र सभी आवश्यक प्रपत्र पूर्ण करा कर संबंधित तहसील कार्यालय में जमा किया जायेगा तथा उसकी प्राप्ति रसीद आवेदक को दी जायेगी। संबंधित तहसीलदार दी गयी सूचनाओं एवं साक्ष्यो के परीक्षण के उपरान्त अपनी स्पष्ट संतुति समान्यतः 2 सप्ताह के अन्दर आवेदन पत्रावली उपजिलाधिकारी को प्रेषित करेगें। उप जिलाधिकारी द्वारा पात्र व अपात्र की क्रास चेकिंग करायी जायेगी और संतुष्ट होने पर अपनी स्पष्ट संस्तुति के सप्ताह में जिलाधिकारी को निस्तारण हेतु प्रेषित की जायेगी। जिलाधिकारी कार्यालय में एक सप्ताह के अन्दर आवेदन पत्र का परीक्षण नियमानुसार निस्तारण/भुगतान की कार्यवाही की जायेगी। स्वीकृत होने की दशा में भुगतान की धनराशि कृषक/विधिक वारिसों के बैंक खाते में आनलाईन किया जायेगा। स्वीकृत/अस्वीकृत की सूचना एसडीएम, तहसीलदार व प्रार्थी को भी दी जायेगी।
सांप/अन्य विषैले जीव जन्तु के काटने की दशा में पोस्टमाटम रिपोर्ट/स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के चिकित्सक का प्रमाणपत्र मान्य होगा।

कृषक की पात्रता
राजस्व अभिलेखो अर्थात खतौनी में दर्ज खातेदार/सह खातेदार अथवा परिवार के ऐसे कमाउ सदस्य जिनकी आजीविका का मुख्य स्त्रोत खातेदार/सह खातेदार के नाम दर्ज भूमि से होने वाली कृषि आय से है अथवा ऐसे भूमिहीन व्यक्ति जो पट्टे से प्राप्त भूमि पर या बटाई पर कृषि का कार्य करतें है तथा जिनकी जीविका का मुख्य साधन ऐसे पट्टे या बटाई पर ली गयी भूमि पर कृषि कार्य है। पट्टेदार के अन्तर्गत असामी पट्टेदार, निजी पट्टेदार सम्मिलित होगें।

योजना का आच्छादन
यदि आग लगने, बाढ, बिजली गिरने, करेन्ट लगने, सांप के काटने, जीव जन्तु/जानवर द्वारा काटने/मारने, समुद्र, नदी, झील, तालाब, पोखर में डुबने, आधी-तुफान, वृक्ष से गिरने, दबने, मकान गिरने, रेल/रोड/वायुयान/अन्य वाहन आदि से दुर्घटना होने, भूस्खलन, भूकम्प, गैस रिसाव, विस्फोट, सीवर चैम्बर में गिरने अथवा अन्य किसी कारण से कृषक की मृत्यु/दिव्यांगता होती है तो कृषक/विधिक वारिस/वारिसों को इस योजना के तहत आर्थिक सहायता अनुमन्य होगी।
यदि कृषक के मृत्यु/दिव्यांगता, आत्महत्या या आपराधिक कार्य स्वयं करते समय होती है तो ऐसी दशा में इस योजना के अन्तर्गत कृषक को कोई सहायता अनुमन्य नही होगी।

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