विश्व रक्तदान दिवस के दिन 70 यूनिट ब्लड डोनेशन सपंन्न

रक्तदान करते अमर उजाला देवरिया प्रभारी मनीष जायसवाल और पूरी टीम
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देवरिया

विश्व रक्तदान दिवस 14 जून को मनाया जाता है आज देवरिया में अमर उजाला के बैनर तले कैप लगा कर स्वेच्छा से लोगो ने ब्लड दान किया और विश्व रक्तदान दिवस एक अच्छा सन्देश दिया, चौथे स्तम्भ से जुड़े सामाजिक गतिबिधियो को देखते हुए अमर उजाला ने अपना योगदान सबसे बड़ा दान में अपना नाम जोड़ दिया, जिसे देख बहुत लोगो ने रक्तदान किया,इस रक्तदान में हिंसा लेने आये पत्रकार, समाज समाजसेवी, विजनेश मैन, पार्टी कार्यकर्ता, डॉक्टर , शिक्षक, और एन सी सी, बटालियन 52 से जुड़े छात्रों ने भी अपना योगदान बखूबी निभाया,यह योगदान हमारे देवरिया में हर दिन ,हर महीने, हर साल, समाज से जुड़े लोग और जिंदगी से जुडी डोर को रक्तदान के माध्यम से समाज में सेवा भाव देते चले आ रहे है,जो हम देवरिया वाशियो के लिए गर्व की बात है.

रक्त दान करते हिमांशु सिंह (रोटरी क्लब देवरिया)

मैं बता दू की विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक के तहत भारत में सालाना एक करोड़ यूनिट रक्त की ज़रूरत है लेकिन उपलब्ध 75 लाख यूनिट ही हो पाता है। यानी क़रीब 25 लाख यूनिट रक्त के अभाव में हर साल सैंकड़ों मरीज़ दम तोड़ देते हैं, शायद यही वजह है की समाज में पहले से ज्यादा अब लोग रक्तदान में बढ़- चढ़ के हिंसा ले रहे है,अनुमान है की आने वाले समय में यह भी समस्या दूर हो जाएगी.
रक्त दान करते एनसीसी कैडेट ,बटालियन 52 देवरिया

देवरिया में कुछ नाम ऐसे भी है जो लगातार रक्तदान कर सेवा करते रहते है,जैसे -हिमांशु सिंह, विनय राय, सौरभ श्रीवास्तव, जीतेन्द्र श्रीवास्तव, सीमा सोनी, पुनीत शाही, यशौर्या सिंह, अजय वर्मा, रणविजय सिंह, मुन्ना राय,अभी आर्य, अर्जुन आर्या, ऐसे तमाम नाम जो अपने स्वेच्छा से ब्लड बैंक पहुंच कर समय समय पर रक्तदान करते है.
रक्तदान करते विनय कुमार राय-नगर महामंत्री एवं जिला कार्यक्रम संयोजक बीजेपी किसान मोर्चा

विश्व रक्तदान दिवस 14 जून को घोषित किया गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा हर साल 14 जून को ‘रक्तदान दिवस’ मनाया जाता है। वर्ष 1997 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 100 फीसदी स्वैच्छिक रक्तदान नीति की नींव डाली है। वर्ष 1997 में संगठन ने यह लक्ष्य रखा था कि विश्व के प्रमुख 124 देश अपने यहाँ स्वैच्छिक रक्तदान को ही बढ़ावा दें। उद्देश्य यह था कि रक्त की ज़रूरत पड़ने पर उसके लिए पैसे देने की ज़रूरत नहीं पड़नी चाहिए, पर अब तक लगभग 49 देशों ने ही इस पर अमल किया है।

तंजानिया जैसे देश में 80 प्रतिशत रक्तदाता पैसे नहीं लेते, कई देशों जिनमें भारत भी शामिल है, रक्तदाता पैसे लेता है। ब्राजील में तो यह क़ानून है कि आप रक्तदान के पश्चात् किसी भी प्रकार की सहायता नहीं ले सकते। ऑस्ट्रेलिया के साथ साथ कुछ अन्य देश भी हैं जहाँ पर रक्तदाता पैसे बिलकुल भी नहीं लेते, हमारे भारत में भी रक्तदान यानि महा दान का दर्जा दिया गया है और यहाँ भी कोई भी व्यक्ति दान कर पैसा नहीं लेता है.

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