यूपी पंचायत चुनाव:गड़बड़ी फैलाने वालों पर नकेल कसेगी पुलिस


यूपी में होने वाले त्रिस्‍तरीय पंचायत चुनावों को लेकर पुलिस सतर्क है। गांव-गांव में ऐसे लोगों की लिस्‍ट बनाई जा रही है जिन पर गड़बड़ी फैलाने का शक है। दावेदारों और उनके समर्थकों पर पुलिस की खास नज़र है। गांवों की गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए पुलिस ने सी-प्‍लान पर काम और तेज कर दिया है। 

अधिकारी भी इस एप पर बराबर नज़र बनाए हुए हैं। निर्देश है कि सी-प्‍लान को तत्‍काल और तेजी से अपडेट किया जाए। सी-प्‍लान में ग्राम प्रधानों के अलावा सम्‍भावित उम्‍मीदवारों और उनके समर्थकों के नाम भी जोड़े जा रहे हैं। पुलिस वाले आजकल गांवों में एक तो सबके नंबर जुटा रहे हैं दूसरे अराजक तत्‍वों की लिस्‍ट बना रहे हैं। देवरिया के एसपी डा. श्रीपति मिश्रा ने बताया कि अराजक तत्‍वों पर लगाम लगाने के लिए सी-प्‍लान को प्राथमिकता के आधार पर प्रभावी बनाया जा रहा है। 

क्‍या है सी प्‍लान 
यह एक ऐसा एप है जो अपराध नियंत्रण और कानून-व्‍यवस्‍था बनाए रखने में पुलिस की बड़ी मदद कर सकता है। इसके एडमिन पुलिस अधीक्षक हैं। इसमें एएसपी, सीओ, थाना प्रभारी, दारोगा, सिपाही, दीवान का मोबाइल नंबर अपलोड है। पुलिसवालों के अलावा इस एप में जिले के गांवों के दस-दस संभ्रांत लोगों के नंबर भी हैं। उनके बारे में अन्‍य जानकारियां भी दी गई हैं। बीट सिपाही एप को खोल कर अपने क्षेत्र के संभ्रांत व्यक्तियों को फोन कर गांव की गतिविधि के बारे में जानकारी प्राप्‍त कर लेते हैं। दारोगा और थाना प्रभारी भी समय-समय पर क्षेत्र के संभ्रांत लोगों से बात कर गांव की गतिविधियों पर नज़र रख रहे हैं। 

गांव में तेज हो गई हैं गतिविधियां
पंचायत चुनाव के मद्देजनर गांवों में गतिविधियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। दावेदारों और समर्थकों को आरक्षण सूची का इंतजार है। प्रशासन तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा है। देवरिया में इस बार 1185 ग्राम पंचायतों में चुनाव कराया जाना है। ग्राम पंचायत वार्डों की संख्या 14686 से घटकर 14615 और क्षेत्र पंचायत वार्डों की संख्या 1380 से घटकर 1365 हो गई है। जिला पंचायत वार्डों की संख्या पहले जितनी यानी  56 है। आरक्षण को लेकर अभी शासन स्‍तर से नीति जारी नहीं हुई है। लेकिन पहले सामान्‍य रही ग्राम पंचायतों को आरक्षित करने और आरक्षित रही ग्राम पंचायतों को सामान्‍य करने की सिफारिशें  प्रशासन के पास लगातार पहुंच रही हैं। कई गांवों में लोग आंकड़ों में हेरफेर की शिकायत भी कर रहे हैं। 

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