परिवार नियोजन में सहायक बन रहे हैं आधुनिक गर्भ निरोधक साधन


देवरिया टाइम्स।
परिवार कल्याण कार्यक्रम के तहत त्रैमासिक गर्भनिरोधक इंजेक्शन अंतरा और साप्ताहिक गोली छाया संबंधित दो दिवसीय प्रशिक्षण का शुभारम्भ सीएमओ डॉ. आलोक पांडेय की अध्यक्षता में सीएमओ कार्यालय में सोमवार को किया गया । इसमें चिकित्सकों को गर्भनिरोधक साधनों के फायदों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। कार्यशाला में प्रशिक्षकों ने सीएचसी से करीब दस आयुष चिकित्सकों  को अंतरा और छाया, महिला नसबंदी एवं पुरुष नसबंदी सहित गर्भ निरोधक साधनों के बारे में प्रशिक्षित किया।
इस दौरान सीएमओ डॉ आलोक पांडेय ने कहा कि  महिलाओं को लम्बे समय तक गर्भधारण से बचाव के लिए गर्भनिरोधक साधन जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर अंतरा व छाया की निःशुल्क सेवा उपलब्ध कर रहा है।

प्रशिक्षण में मास्टर ट्रेनर डॉ. शशिप्रभा ने बताया कि छाया गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन तीन माह तक सप्ताह में दो बार तथा उसके बाद केवल सप्ताह में एक बार ही करना होगा। वह दंपत्ति जिनका परिवार अभी पूरा नहीं हुआ है,  अभी बच्चे नहीं चाहते हैं या दो बच्चों मे अंतर रखना चाहते हैं। अनचाहे गर्भधारण से बचने के लिए व प्रसव पश्चात, बच्चे को दूध पिलाने वाली माताएं छह सप्ताह बाद अंतरा या छाया का उपयोग कर सकती हैं। उन्होंने बताया इन साधनों मे अंतरा इंजेक्शन व छाया गोली परिवार नियोजन में काफी सहायक बन रही है। अंतरा एक आधुनिक एवं अस्थाई तिमाही गर्भ निरोधक साधन है। दूध पिलाती मां प्रसव के छह सप्ताह बाद अंतरा अपना सकती हैं। इससे दूध की मात्रा और गुणवत्ता पर कोई असर नहीं पड़ेगा । जो महिलाएं गर्भ निरोधक गोली नहीं खा सकतीं वह इसका इस्तेमाल कर सकतीं हैं। इससे संबंध बनाने में किसी प्रकार की समस्या नहीं होगी और कुछ मामलों में यह  माहवारी के दौरान होने वाली ऐठन को भी कम करता है। न्यू कांट्रासेप्टिव पिल्स यानी गर्भनिरोधक गोलियां भी महिलाओं द्वारा अपनाए जाने वाले अस्थाई विकल्प हैं।
कार्यशाला में डा. अखिलेश त्रिपाठी, डा. रविंद्र सिंह, डा. जफर अनीस, डा. प्रदीप कुमार, डा. प्रमिला सिंह, डा. आँचल गुप्ता, डा. ममता, डॉ . रवि प्रकाश और संजय त्रिपाठी सहित अन्य स्टाफ मौजूद रहे।

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