कलियुग में श्रीराम कथा का श्रवण कामधेनु के समान:राजन जी महाराज


देवरिया टाइम्स

नौ दिवसीय श्रीरामकथा का शुभारंभ सोमवार को रामलीला मैदान में मंगलाचरण से हुआ। पहले कथा में श्रीरामकथा के महात्म्य की कथा सुनाई गई। भगवान के भजनों की स्वर लहरियां पंडाल में गूंजती रहीं। श्रद्धालु देर तक भक्ति की गंगा में गोते लगाते रहे। मंगलवार को शिव विवाह की कथा सुनाई जायेगी।सबसे पहले व्यासगद्दी पर राजन जी महाराज भगवान का पूजन किया। मुख्य यजमान अरुण बरनवाल व डॉ. सौरभ श्रीवास्तव ने पूजा के फूल दिए। हनुमान चालीसा का पाठ हुआ। सभी ने एक साथ रामायण जी की आरती गाई। इससे पंडाल में भक्ति की धारा बहने लगी। कथा का रसपान कराते हुए राजन जी महाराज ने कहा कि तुलसी दास, याज्ञवल्क्य और भगवान शिव रामकथा के तीन वक्ता हुए हैं। तीनों ने रामकथा की अपने ढंग से महिमा बताई है। कथा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि तुलसीदास ने रामकथा को कलियुग में कामधेनु के समान बताया है। जिस प्रकार से कामधेनु मनवांछित फल प्रदान करती है, रामकथा से भी इच्छित फल मिलता है।

उन्होंने कहा कि रामकथा रूपी दवा को लिया जाय तो जीवन के सभी समाप्त हो जाते हैं। राजनी ने आगे कहा कि रामकथा के तीसरे वक्ता भगवान शिव स्वयं हैं। उन्होंने कहा कि भगवान शिव ने मां पार्वती को रामकथा सुनाया। उन्होंने कहा कि हमीं सब हैँ, यह मोह है। जो भगवान की मर्जी में अपनी मर्जी मिला ले वही भक्त है। बाकी सब बेकार है।

कथा का रसपान करने वालों में छत्तीसगढ़ से आये पुरुषोत्तम सिंह, विजय कुमार सिंह, हलचल सिंह पटेल, प्रेम अग्रवाल, रविकांत मणि, सुमन श्रीवास्तव, प्रदीप राव, मृत्युंजय सिंह, तेज बहादुर पाल, सत्येंद्र मणि त्रिपाठी, प्रशांत श्रीवास्तव, दिनेश मिश्र, सुधांशु रजंन मिश्र, कृष्णमोहन गुप्त, लाल बहादुर, प्रेम अग्रवाल आदि मौजूद रहे।

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