पहली बार देवरिया में जिला पंचायत अध्यक्ष के पद पर खिला कमल, गिरीश चन्द्र तिवारी हुए विजयी


देवरिया टाइम्स

जनपद में आज जिला पंचायत अध्यक्ष पद की मतदान/मतगणना का कार्य निष्पक्ष, शान्तिपूर्ण एवं सकुशल सम्पन्न हुआ। सभी निर्वाचक 56 सदस्यों ने अपने मत का प्रयोग किए। कुल पडे मतों में 42 मत भाजपा प्रत्याशी गिरीश चन्द्र तिवारी प्राप्त कर निर्वाचित हुए। सपा के उम्मीदवार शैलजा यादव को 11 मत मिले। 3 मत अवैध पाया गया।


जिला निर्वाचन अधिकारी(जिला पंचायत अध्यक्ष)/जिलाधिकारी आशुतोष निरंजन ने मतदान एवं मतगणना कार्यो को सम्पादित कराया तथा विजयी प्रत्याशी गिरीश चन्द्र तिवारी को प्रमाण पत्र प्रदान किया। निर्वाचन कार्यो को सम्पन्न कराने में सीआरओ अमृत लाल बिन्द, अपर जिलाधिकारी प्रशासन कुवर पंकज ने अपनी सहभागिता निभायी।

मतदान प्रक्रिया शुरु होने के पूर्व जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक डा श्रीपति मिश्र ने सुरक्षा व्यवस्था का एक-एक प्वाईन्टों पर गहन निरीक्षण कर तैनात कर्मियों को सुरक्षा के चाक-चौबंद रखे जाने का निर्देश दिए। मतदान आयोग द्वारा निर्धारित समय पूर्वान्ह् 11 बजे से 03 बजे तक सम्पन्न हुई, इसके उपरान्त मतगणना का कार्य प्रारम्भ हुआ। परिणाम आने पर विजयी प्रत्याशी श्री तिवारी को प्रमाण पत्र प्रदान किया गया।


जिलाधिकारी ने निष्पक्ष, सकुशल एवं शान्तिपूर्ण ढंग से मतदान एवं मतगणना सम्पन्न कराने के लिए निर्वाचन कार्य में लगे प्रशासनिक एवं पुलिस सहित जुडे सभी विभागो के अधिकारियों, कर्मचारियों एवं मीडिया प्रतिनिधियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस निर्वाचन कार्य सम्पन्न कराने हेतु राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा नामित प्रेक्षक आशीष कुमार पूरे समय तक मतदेय एवं मतगणना स्थल न्यायालय जिलाधिकारी कक्ष में उपस्थित रह कर निर्वाचन प्रक्रियाओं का जायजा लेते रहे। सभी मतदान एवं मतगणना का कार्य प्रेक्षक के मौजूदगी में निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से सम्पन्न हुआ। पुलिस अधीक्षक श्री मिश्र भी पूरे समय तक जमे रहे और सुरक्षा को लेकर मातहतो को निर्देश देते रहे।

एक नजर में देवरिया जिला पंचायत

आजादी के बाद पहली बार जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर कमल खिला है। भाजपा प्रत्याशी गिरीश चंद्र तिवारी ने चुनाव जीतकर जिला पंचायत के आठवें अध्यक्ष बनने का गौरव प्राप्त किया है। जिला परिषद अध्यक्ष के 47 और जिला पंचायत अध्यक्ष के 26 वर्ष के कार्यकाल में कई बार चुनाव हुए लेकिन कभी अध्यक्ष की कुर्सी पर कमल नहीं खिल सका। भाजपा प्रत्याशी गिरिश तिवारी ने चुनाव जीतकर न केवल एक इतिहास कायम किया है। बल्कि पहली बार जिला पंचायत में कमल खिलाने का श्रेय उन्हें मिला हैं।
 


जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव सियासी मायने में काफी महत्वपूर्ण था। जिला परिषद का पहला चुनाव एक मई 1948 को हुआ। जहां चंद्रशेखर पांडेय शास्त्री को पहला अध्यक्ष बनने का गौरव प्राप्त हुआ। इनके बाद स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्रयागध्वज सिंह वर्ष 1961 में अध्यक्ष बने थे। इसके बाद 15 जुलाई 1963 को मोहम्मद फारूक चिस्ती अध्यक्ष नामित हुए।25 अक्तूबर 1963 को राजमंगल पांडेय को अध्यक्ष बनने का गौरव प्राप्त हुआ। इसके बाद दोबारा प्रयागध्वज सिंह 13 अप्रैल 1969 को अध्यक्ष बने। वर्ष 1974 में बिरजानंद सिंह अध्यक्ष बनें। वर्ष 1989 में गौकरण सिंह अध्यक्ष बने, उनके कार्यकाल के दौरान एक माह के लिए सुभाष त्रिपाठी को अध्यक्ष बनने का गौरव प्राप्त हुआ।


छह अक्तूबर 1994 को गौकरण सिंह दोबारा अध्यक्ष की कुर्सी पर आसीन हो गए और 22 मई 1995 तक रहे। जिला परिषद के वह अंतिम अध्यक्ष रहे। उधर पंचायती राज अधिनियम लागू होने के बाद वर्ष 1995 के चुनाव में भाजपा ने भाग्य आजमाया। दमयंती विश्वकर्मा चुनाव लड़ीं लेकिन हार गईं। कांग्रेस की द्रौपदी मल्ल चुनाव जीत गईं।अविश्वास प्रस्ताव आने के बाद धनंजय राव को अध्यक्ष बनाया गया। इसी दौरान 1999 में हुए चुनाव में सपा की शकुंतला यादव अध्यक्ष बनीं। वर्ष 2000 में हुए चुनाव में कृष्णा जायसवाल निर्दल चुनाव जीतकर अध्यक्ष बनीं। अविश्वास प्रस्ताव आने के बाद कुछ दिनों के लिए राणाप्रताप सिंह अध्यक्ष की कुर्सी पर विराजमान हुए।
वर्ष 2005 के चुनाव में आनंद कुमार सिंह चुनाव जीते। वर्ष 2010 के चुनाव में तत्कालीन बसपा एमएलसी श्रीनाथ एडवोकेट की पत्नी बालेश्वरी देवी अध्यक्ष चुनी गईं और कार्यकाल पूरा किया। वर्ष 2015 के चुनाव में सपा के रामप्रवेश यादव चुनाव जीतकर अध्यक्ष बने लेकिन कार्यकाल पूरा नहीं कर सके। लंबे समय बाद गिरीश चंद्र तिवारी अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठेंगे।

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