मानसून की पहली बारिश में ही डूब गया देवरिया शहर


देवरिया टाइम्स

1998 का साल का मास्टर प्लान 23 साल बीते, अब भी कागजों में..? मास्टर प्लान विभाग जनपद देवरिया भू माफियाओं की गुलाम है..? प्लान लागू होने के बाद सबसे पहला काम जोनल प्लानिंग का होना था। प्लान के ही नियम कहते हैं कि पहले छह माह में इस पर काम शुरू होना चाहिए, ताकि हर पांच वर्ष की निर्धारित योजना पर अमल हो सके। यह तो कागदी बीमारी है..? 1998 का बाढ़ देखते हुए जब देवरिया शहर डूब रहा था तब तत्कालीन जिलाधिकारी देवरिया मास्टर प्लान पर कार्य किए कार्य शुरू हुआ लेकिन देवरिया का दुर्भाग्य तत्कालीन जिलाधिकारी का ट्रांसफर हो गया।

जिस ठेकेदार को यह काम मिला, उसने प्लान बदल दिया लेकिन नगर पालिका परिषद देवरिया एवं जनप्रतिनिधि और जिला मजिस्ट्रेट बदलते रहे लेकिन इसे आज तक लागू नहीं किया। इसमें और कितना समय लगेगा यह भी तय नहीं है। मास्टर प्लान के अनुसार जो सरकारी कार्य 1998 में होना था पैसा भी आ चुका था पैसा कहां खर्च हुआ हुआ आज तक पता नहीं चला : मास्टर प्लान में पहले चरण के कुछ प्रमुख बिंदु तय था हर तीन माह में होना थी बैठक..? प्लान पर अमल के लिए हर तीन माह में बैठक का प्रावधान है। बैठकें तो हुई, लेकिन समाधान कम उलझने ज्यादा बढ़ी। संभागायुक्त अटके नियमों को लेकर चर्चा की लेकिन निराकरण नहीं हो पाया। प्रोजेक्ट अटके हैं। सरकारी धन खत्म हो गया। प्लान के सही क्रियान्वयन के लिए सरकार ने इसकी स्वीकृति भी दी धन भी दिया पर प्रक्रिया घोषणा तक ही सीमित रही।

कुछ भू माफियाओं को संरक्षण देने के लिए क्योंकि 1998 से लेकर आज तक नगर पालिका परिषद देवरिय भू माफियाओं की गुलाम रही है..? इसलिए जरूरी है अथॉरिटी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए अथॉरिटी बनाई जाए निगम एक्ट में करना होगा संशोधन इस तरह अटका > प्लान लागू होंगे लेकिन भू माफियाओं से प्रभावित होंगे > नक्शे से प्रभावित लोगों हाई कोर्ट में गुहार लगाएंगे तो कोर्ट ने फिर आपत्तियां बुलाने का फैसला सुनाया। > आवास एवं पर्यावरण मंत्रालय अपनी डफली अपना राग सुनाएगा > प्रमुख सचिव आपत्तियों का निराकरण किया। > इस बीच कोर्ट पहुंचे कुछ लोगों को फिर सुना जाएगा। > मुख्यमंत्री बदलते रहेंगे और चुनाव आचार संहिता लगता रहेगा। > अचार संहिता खत्म हुआ अफसरों का दावा है इसी माह के अंत में संशोधित प्लान आ जाएगा। साल में खत्म हो जाएगी समय-सीमा मास्टर प्लान में 1998 से 2021 तक की कार्ययोजना है। तमाम विवादों और दावे-आपत्तियों के बीच 23 साल बाद 2021 तक की प्लानिंग को लेकर बने प्लान के लिए 2022 आ गया करना बड़ी चुनौती है। पहले प्लान पर सही अमल न होने के दुष्परिणाम परिणाम- जनसंख्या तीन गुना बढऩे से आवासीय इकाइयों व सुविधाओं पर दबाव बढ़ा। निम्न जीवन स्तर की स्थिति बनी।

वर्तमान अधिक आबादी झुग्गी-झोपड़ी में रहती है। परिणाम- बेतरतीब फैलाव से पार्किंग व पर्यावरण प्रदूषण की समस्या। परिणाम- इसी कारण नगर पालिका परिषद देवरिया के ठेकेदारों का विकास हुआ। परिणाम- सीमित क्षेत्र में सिमट गया मनोरंजन। कॉलोनियों में खेल के मैदान, सभा स्थल, सार्वजनिक आयोजनों के लिए जगह ही नहीं बची।

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