टेढ़-मेढ़े पैरों की सर्जरी कर दिव्यांगता से बचाए जा रहे बच्चे, जून माह में अब तक आठ बच्चों का हुआ सफल आपरेशन



 
देवरिया टाइम्स।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज में  टेढ़े मेढ़े पैरों की सर्जरी छोटे बच्चों के लिए वरदान साबित हो रही है। क्लब फुट क्लीनिक में हो रहे ऑपरेशन से यह बच्चे दिव्यांगता की चपेट में आने से बच रहे हैं।

 जून माह में ही आठ ऑपरेशन किए गए जो सफल रहे हैं।
मेडिकल कालेज से संबद्ध बाबू मोहन सिंह जिला चिकित्सालय में क्लब फुट क्लिनिक मिरैकल फीट संस्था के सहयोग से संचालित की जा रही है। इस क्लिनिक तक पहुंचाने के लिए जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आरबीएसके टीम ने मरीजों को चिह्नित किया। इसके बाद उन्हें जिला अस्पताल में भेजा गया, जहां उनकी काउंसिलिंग की गई और आपरेशन के लिए कहा गया।

  अस्पताल में आयोजित शिविर में आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. शुभलाल शाह ने आरबीएसके टीम द्वारा भेजे गये आठ बच्चों के टेढ़े-मेढ़े पंजे की सर्जरी की। सभी बच्चों के पैरों की सर्जरी सफल रही। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल के क्लब फुट ‌क्लीनिक में भाटपाररानी की सोम्या, गौरीबाजार के कार्तिक पासवान, देवरिया सदर ब्लाक के प्रिंस, अजहां परवीन, महावीर, कुलशुम फातिमा, भलुअनी के अहमद अंसारी की सर्जरी की गई।
मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डा. राजेश कुमार बरनवाल ने कहा कि दो वर्ष से छोटे बच्चे जो क्लब फुट (टेढ़े मेढ़े पंजे) से पीड़ित हैं, देवरहवा बाबा मेडिकल कालेज से संबद्ध बाबू मोहन सिंह जिला चिकित्सालय में निःशुल्क इलाज करा सकते हैं। क्लब फुट का यदि सही समय पर इलाज न कराया गया तो दिव्यांगता का रूप ले लेता है।

 उन्होंने कहा कि इसकी पहचान जन्म के समय कर लिया जाए तो क्लब फुट जैसी कई अन्य जन्मजात बीमारियों का न सिर्फ इलाज संभव है बल्कि इससे शिशु मृत्युदर और दिव्यांगता में कमी लाई जा सकती है। मिरैकल फीट संस्था की ओर से इस वर्ष ऐसे 83 बच्चों को का आपरेशन किया जा चुका है।
 
54 दिन  की बच्ची का पांचवी बार हुआ प्लास्टर
 


विजयीपुर निवासी कृष्णा मणि त्रिपाठी ने बताया कि 11 अप्रैल 2022 को उनकी पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में पूजा ने एक बच्ची को जन्म दिया। बच्ची के पैर टेड़े मेढे थे तो वह लोग परेशान हो गए। अस्पताल कि एक नर्स ने आरबीएसके योजना के बारे में बताया तो वह लोग बच्ची को लेकर जिला अस्पताल के क्लब फुट क्लिनिक में गए, जहां डाक्टर ने कहा कि प्लास्टर और उसके बाद सर्जरी के बाद बच्ची का पैर सही हो जायेगा। अब तक बच्ची का 54  दिन में पांचवी बार प्लास्टर हो चुका है।  जल्द ही उसकी सर्जरी भी की जाएगी।
 
 
निशुल्क होती है सर्जरी
 
आरबीएसके योजना के नोडल  आकारी  डॉ.  राजेंद्र प्रसाद  ने कहा  कि प्राइवेट  अस्पताल में क्लब फुट से ग्रसित बच्चों के आपरेशन पर अधिक पैसा  खर्च होता  है। एक  आपरेशन पर करीब दस से बीस हजार रूपये तक लगते हैं, जबकि जिला अस्पताल के क्लब फुट क्लीनिक में ऐसे बच्चों का निःशुल्क इलाज किया जाता है।

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