सिविल लाइंस रोड पर भटवलिया चौराहा से गोरखपुर ओवरब्रिज तक एवं मालवीय रोड नो-वेंडिंग जोन घोषित



देवरिया टाइम्स।

अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) गौरव श्रीवास्तव ने बताया कि शहर के प्रमुख मार्गो यथा सिविल लाइंस रोड, मालवीय रोड, को-ऑपरेटिव चौराहा से हनुमान मंदिर (रामलीला मैदान रोड) हनुमान मंदिर से राघव नगर-कचहरी चौराहा (शिव मंदिर) तक तथा जलकल रोड आदि प्रमुख मार्गों पर लगने वाले जाम तथा उससे आमजन को होने वाली कठिनाइयों एवं अन्य समस्याओं के समाधान के लिए प्रमुख व्यापार प्रतिनिधियों से सम्यक विचारोपरान्त कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं।

एडीएम प्रशासन ने बताया कि सिविल लाइंस रोड पर *भटवलिया* चौराहा से गोरखपुर ओवरब्रिज तक एवं मालवीय रोड को नो-वेंडिंग जोन घोषित किया गया है। नगर पालिका द्वारा इन मार्गों पर नो वेंडिंग जोन का साइन बोर्ड लगवाया जाएगा। दिनांक 1 सितंबर 2022 से इन मार्गों पर सड़क के किनारे पटरी पर एवं उसके पीछे नाले पर ठेला रेहड़ी व पटरी दुकानदारों की कोई दुकान नहीं लगेगी। सिर्फ वाहनों की पार्किंग मात्र पटरी तक की जा सकती है। सड़क को बिल्कुल भी बाधित नहीं किया जाएगा।

इन मार्गों पर स्थित दुकानों के आगे पोल लगाकर कोई स्थायी शेड नहीं लगाया जाएगा। अस्थाई शेड लगाया जा सकता है, जिसमें एकरूपता रहेगी। यदि किसी दुकानदार द्वारा इसका उल्लंघन किया जाएगा तो शेड हटवाने के साथ ही साथ उसे जुर्माना भी वसूला जाएगा।

को-आपरेटिव चौराहे से हनुमान मंदिर (रामलीला मैदान रोड) एवं हनुमान मंदिर चौराहे से राघव नगर होते हुए कचहरी चौराहा (शिव मंदिर तक) का मार्ग दिनांक 1 सितंबर 2022 से वन-वे रहेगा। यह व्यवस्था स्थानीय लोगों दुकानदारों एवं बाहर से आने वाले लोगों; सभी के लिए समान रूप से लागू होगी। इसका कड़ाई से पालन कराया जाएगा।

अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) ने बताया कि इन मार्गों पर दोनों तरफ व्यवसायिक प्रतिष्ठान स्थित हैं, जहां पार्किंग की कोई व्यवस्था इन प्रतिष्ठानों द्वारा नहीं की गई है।  दुकानदारों एवं ग्राहकों द्वारा अपना वाहन दुकान के सामने सड़क एवं सड़क की पटरी के ऊपर ही खड़ा किया जाता है, जिसके कारण सड़क संकरी हो जाती है और जाम से समस्या उत्पन्न होती है।

उन्होंने बताया कि पटरी एवं रेहड़ी व्यवसायियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर कोतवाली रोड एवं महिला थाने के निकट स्थान चिन्हित किये गए है, जहाँ वे अपना व्यवसाय कर सकते हैं।

अपर जिलाधिकारी प्रशासन ने बताया कि शहर में जाम लगने का एक प्रमुख कारण ई-रिक्शा वाहनों का अनियमित संचालन एवं पार्किंग होना भी है। जनपद में लगभग चार हजार ई-रिक्शा वाहन हैं, जिनमें से करीब 1500 वाहन ऐसे हैं, जिनके पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं है। इस संबंध में एआरटीओ को निर्देशित किया गया है कि वे निरंतर चेकिंग अभियान चलाकर ऐसे वाहनों के विरुध्द नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करें। ई-रिक्शा वाहनों के संचालन एवं पार्किंग के लिए भी योजना बनाई जा रही है।

अपर जिलाधिकारी प्रशासन ने जनपदवासियों से अनुरोध किया कि वह इस नवीन ट्रैफिक व्यवस्था का अनुपालन कर शहर को जाम मुक्त रखने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दें।

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