लिखित में पास और मौखिक परीक्षा में फेल हो गए एलएलबी के पांचवें सेमेस्टर के 27 विद्यार्थी,भविष्य अधर में

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देवरिया टाइम्स
संत विनोबा पीजी कॉलेज में एलएलबी के पांचवें सेमेस्टर की 24वें प्रश्न पत्र की मौखिक परीक्षा में 80 छात्र-छात्राओं में 27 को फेल घोषित कर दिया गया। पिछले 25 वर्षों के रिकॉर्ड में ऐसा पहली बार हुआ है। इसे लेकर विद्यार्थियों में नाराजगी है। उन्होंने विभागाध्यक्ष पर विद्यार्थियों का भविष्य खराब करने का आरोप लगाया है।


उधर, कॉलेज प्रशासन ने इस संबंध में गोरखपुर विश्वविद्यालय को पत्र लिखकर छात्रहित में समस्या के निराकरण की मांग की है। कॉलेज में एलएलबी के पांचवें सेमेस्टर का परीक्षाफल नवंबर में घोषित हुआ है। इसमें कुल 80 छात्र-छात्राओं में 27 को 24वें प्रश्न पत्र (प्रोफेशनल एथिक्स एंड प्रोफेशनल एकाउंटिंग सिस्टम) में अनुत्तीर्ण कर दिया गया है। जबकि सभी छात्र-छात्राएं लिखित परीक्षा में पास हैं। ऐसे में एक साथ 27 विद्यार्थियों के फेल होने से विभाग की कार्यप्रणाली पर ही सवाल उठने शुरू हो गए हैं।


कॉलेज से ही जुड़े लोगों के अनुसार ऐसा पिछले 25 वर्ष के इतिहास में पहली बार हुआ है कि जिस प्रश्नपत्र की लिखित परीक्षा में सभी पास हैं, उसके मौखिक में निर्धारित 50 अंकों में पासिंग मार्क्स 18 अंक भी विद्यार्थी नहीं पाए हैं। 27 में अधिकांश विद्यार्थियों को 13, 14, 15, 16, 17 तक नंबर दिए गए हैं। परीक्षाफल से नाराज विद्यार्थियों को अब अपना भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है।
लिखित परीक्षा में पास, मौखिक में कर दिया अनुत्तीर्ण
अमित गौड़, अनिल भारती, अंजली मणि त्रिपाठी, अविनाश श्रीवास्तव, चंद्रप्रकाश त्रिपाठी, दिप्ति श्रीवास्तव, दुर्गावती यादव, हरेराम गुप्ता, हरिश्चंद्र चौहान, ज्योति शाही, कंचन मिश्रा, लक्ष्मी मिश्रा, नेहा जैसवाल, पूजा पांडेय, प्रियंका मद्घेशिया, प्रियांशु पाठक, राजन, राजकुमार सिंह, रामसिंह यादव, शशांक कुमार, सोनी चौधरी, विश्वदीपक मिश्र, ऋषिकेश मिश्रा का कहना है कि लिखित में वह पास हैं। फिर भी जानबूझकर मौखिक में फेल कर दिया गया। जिससे उनका भविष्य खराब हो जाएगा। छात्रा ज्योति शाही ने बताया कि हाईकोर्ट में लॉ क्लर्क की ट्रेनी की जॉब के लिए उसने आवेदन किया था। उसके इंटरव्यू का बुलावा पत्र भी आ गया है, लेकिन अब वहां से बताया गया है कि उसके स्टेट्स में बैकिंग पेपर दिखा रहा है। उसके फाइनल ईयर के अंकपत्र में इस प्रश्न में अनुत्तीर्ण होने से वह यह जॉब पाने से वंचित हो जाएंगी।
सदर विधायक को बताई समस्या
कॉलेज के राजनीतिशास्त्र विभाग के अध्यक्ष एवं वर्तमान में सदर विधायक डॉ. सत्यप्रकाश त्रिपाठी से भी विद्यार्थियों ने अपनी समस्या बताई है। इस संबंध में उन्होंने कुलपति को फोन कर विद्यार्थियों की समस्या का समाधान निकालने का आश्वासन भी दिया है। हालांकि अभी तक इस मामले में कोई भी रास्ता नहीं निकला है।
विद्यार्थियों ने भुगता है परीक्षक की सख्ती का परिणाम : एचओडी
कॉलेज के विधि विभाग के अध्यक्ष डॉ. केके शाही ने रविवार को बताया कि पांचवें सेमेस्टर की परीक्षा वर्ष 2019 में हुई थी। इसमें दो प्रैक्टिकल के पेपर होते हैं। 50 नंबर का इंटरव्यू, जिसमें 25 नंबर वाइबा एवं 25 नंबर कक्षा में विद्यार्थी की उपस्थिति, सामान्य व्यवहार एवं प्रभाव के लिए दिया जाता है। बार काउंसिल का भी स्पष्ट आदेश है कि 75 प्रतिशत से कम उपस्थिति वालों को कानून की पढ़ाई में पास न किया जाए। कॉलेज के कुछ छात्र-छात्राएं क्लास में पढ़ने की अपेक्षा कोचिंग पर ज्यादा ध्यान दे रहे थे, वह कॉलेज तो आते थे, लेकिन घूमते रहते थे। इस संबंध में उन्हें चेतावनी भी दी गई थी। इसलिए इस बार उपस्थिति को अनिवार्य कर दिया गया था। ऐसे में जैसे विद्यार्थियों की उपस्थिति थी, वैसे ही उनके सामने रखा गया। परीक्षक ने भी इनके प्रति सख्ती दिखा दी। इस मामले में विद्यार्थियों ने अनुशासनहीनता का खामियाजा भुगता है। हालांकि इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों का फेल होना दुर्भाग्यपूर्ण है। इसके लिए परीक्षा नियंत्रक से भी बात की गई है। जल्द ही कुछ न कुछ समाधान अवश्य निकाला जाएगा।
नंबर देना परीक्षक का विशेषाधिकार, कुलपति से की गई है शिकायत
कॉलेज के प्राचार्य डॉ. वाचस्पति द्विवेदी ने बताया कि यह जांच का विषय है। मौखिक परीक्षा में फेल विद्यार्थी भले कुछ भी आरोप लगाएं, विश्वविद्यालय से जो परीक्षक आए थे, उन्होंने ही मौखिक परीक्षा ली और उसी के आधार पर इन्हें नंबर भी दिया होगा। यह उनका विशेषाधिकार है। इस संबंध में कॉलेज प्रशासन की ओर से कुलपति को पत्र लिखा गया है। विद्यार्थियों का भला हो जाए, इसके लिए सभी प्रयासरत हैं।

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