अध्यात्म का केंद्र है नोनापार का मणिनाथ बाबा धाम- गौसेवा की अद्भुत ऐतिहासिक कथा


देवरिया टाइम्स। देवभूमि देवरिया के नोनापार रेलवे स्टेशन से मात्र 200 मीटर की दूरी पर स्थित है मनिनाथ धाम जहाँ भक्तो की अपार भीड़ होती है तथा भक्त बाबा की भक्ति रस का पान करते है सोमवार और शुक्रवार को बाबा का श्रृंगार होता है, भक्तो द्वारा उनको दूध से नहलाया जाता है,

सोमवार और शुक्रवार को जो सच्चे मन से दर्शन करता बाबा उसके मन की मुराद पूरी करते है दूर दूर से लोग आते है कीर्तन तथा भंडारा करते है और प्रसन्न होकर जाते है, पौराणिक कथा के अनुसार बाबा मनिनाथ एक संत, सत्यवादी, धर्मार्थ, गौ सेवक थे वे एक कपिला गाय रखे थे जिसको बाधते नही थे बाबा की भाषा गाय समझती थी

तथा बाबा उसकी भाषा समझते थे बाबा उसकी भाषा गाय समझकर नही बल्कि माता के रूप मे करते थे बाबा घास भी धोकर खिलाते थे बाबा जो भोजन खुद खाते कोशिश करते गया के लिए भी वही ब्यवस्था हो एक साथ भोजन करना एक साथ हमेशा रहना बाबा को जब दूध की जरूरत होती गाय से मांग लेते और जीतनी आवश्यकता होती उतना ही लेते दोनो लोग मजे से जीवन यापन कर रहे थे, उसी समय मझौली के राजा की नजर उस गाय पर पड़ी और राजा मोहित हो गए राजा ने बाबा से गाय माँगा बाबा ने मना कर दिया, बाहूबल का जमाना हमेशा रहा है, राजा ने अपने सैनिको के बल पर बाबा से गाय जबरन छीन लिया, गाय और बाबा दोनो एक दूसरे के लिए बिलखते, रह गए परिणाम स्वरूप दोनो ने भोजन और जल का त्याग कर दिया गौ माता बाबा की याद मे अनवरत रोती रही तथा राजा के दरबार मे ही अपना प्राण त्याग दिया इधर बाबा के अन्न जल त्यागने के कारण शरीर दुर्बल हो गया लेकिन इसी बीच राजा की एक पुत्री थी जिसने बाबा को जल पिलाने का प्रयास किया

बाबा ने जल ग्रहण नही किया और राजा को श्राप दिया की जाओ तुम्हारा धन, वैभव शक्ति सबका नाश हो जायेगा तुम्हारे परिवार मे किसी को संतान नही होगा चुकी तुम्हारी पुत्री ने मुझे जल पिलाने का प्रयास किया इसलिए इसका वंश चलेगा लेकिन तुम्हारा नही बाबा ने भी अपना प्राण त्याग दिया जहाँ उनका स्थान बना है जो मनिनाथ धाम के नाम से जाना जाता है जो सच्चे मन से जाता है बाबा उसकी मनोकामना पूरी करते है। जय बाबा मणिनाथ।

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