नए कृषि कानूनों के ख़िलाफ़ युवा ने रखा एक दिवसीय उपवास

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देवरिया टाइम्स

बरहज तहसील के ग्राम सभा खोरी निवासी और बीएचयू के छात्र विक्रान्त निर्मला सिंह ने हाल ही में कृषि क्षेत्र के लिए लाए गए तीन नए कानूनों के ख़िलाफ़ किसानों द्वारा बुलाए गए भारत बंद के समर्थन में अपने गांव में एक दिवसीय उपवास किया।

विक्रान्त का कहना है कि तीनों ही बिल कृषि सुधारों के नाम पर किसानों की खेती-बारी उनके हाथ से निकालकर कारपोरेट को देने की तैयारी है। उन्होंने कहा कि मंडी व्यवस्था में कमियां है और यह सरकार का तर्क बिल्कुल ठीक है लेकिन इन तीनों ही कानूनों में कहीं भी मंडी व्यवस्था के अंदर व्याप्त कमियों को दूर करने की बात नहीं कही गई है। बल्कि एक समानांतर निजी व्यवस्था को खुली छूट देने की बात की गई है। वर्तमान में देश में 7000 कृषि मंडी या हैं और जरूरत 42000 कृषि मंडियों की है। सरकार इन मंडियों को बनाने की अपनी जिम्मेदारी से मुक्त होना चाहती है।

सरकार कोई एक सफल उदाहरण दे जहाँ खुले बाज़ारों ने किसानों को अमीर बनाया हो? बिहार में यह प्रक्रिया 2006 से ही चालू हो गई थी लेकिन आज भी बिहार कृषि आय के मानक पर सबसे पिछड़ा राज्य है।

आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक, 2020″। यह ना सिर्फ़ किसानों के लिए बल्कि आम जन के लिए भी ख़तरनाक है।

अब कृषि उपज जमा करने की कोई सीमा नहीं होगी। उपज जमा करने के लिए निजी निवेश को छूट होगी। सरकार को पता नहीं चलेगा कि किसके पास कितना स्टॉक और कहाँ है? खुली छूट। यह तो जमाख़ोरी और कालाबाज़ारी को क़ानूनी मान्यता देने जैसा है। सरकार क़ानून में साफ़ लिखती है कि वह सिर्फ़ युद्ध या भुखमरी या किसी बहुत विषम परिस्थिति में रेग्युलेट करेगी।

सरकार कह रही है कि इससे आम किसानो को फ़ायदा ही तो है। वह सही दाम होने पर अपनी उपज बेचेंगे। लेकिन यहां मूल सवाल तो यह है कि देश के कितने किसानी के पास भंडारण की सुविधा है? हमारे यहां तो 80% तो छोटे और मझोले किसान है। यह काम तो सिर्फ निजी क्षेत्र के बड़े पूंजी वाले लोग कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार यह बिल वापिस ले और किसानों को एमएसपी कानूनी मान्यता देने के लिए नया बिल लेकर संसद में आए। अगर ऐसा नहीं होता है तो किसानों का दुनिया उजड़ जाएगी सरकार के बाजार बचाते रहने में।

उन्होंने कहा कि निकट भविष्य में पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसानों को एकजुट कर एक नए कृषि आंदोलन को खड़ा किया जाएगा। सरकार को यह बिल वापस लेना पड़ेगा।

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