फूड सेफ्टी अधिनियम २००६ का पालन नही करते ग्रामीण दुकानदार (FBO), अधिकांश के पास नही है- “वैध फूड लाइसेन्स” कभी भी हो सकती है विभाग की बड़ी कार्यवाही-

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खाद्य पदार्थ तैयार करने वाले और बेचने वालों/ दुकानदारों को फूड सेफ्टी का लाइसेंस बनवाना अनिवार्य होता है। इसमें वे सभी दुकानदार, सामान्य ठेली लगाने वालों से लेकर बड़े होटल और उद्योग तक शामिल होते हैं। खाद्य सुरक्षा अभिकरण के लाइसेंस के बिना खाद्य पदार्थों की बिक्री नहीं की जा सकती है। यह कानूनन जुर्म है, इसमें सजा या जुर्माना हो सकता है अभी तक यह लाइसेंस जिला अभिहीत अधिकारी के स्तर से जारी किए जाते थे। इसके लिए व्यापारियों को कार्यालय के चक्कर काटने पड़ते थे। साथ ही फूड इंस्पेक्टर की खुशामद भी करनी पड़ती थी। लेकिन अब फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड ऑथिरिटी ऑफ इंडिया ने सालाना 12 लाख से कम टर्नओवर वालों को राहत दी है।ऑथिरिटी की नई एडवाइजरी के अनुसार सालाना 12 लाख से कम टर्नओवर वाले व्यापारी घर बैठे अपना रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। रजिस्ट्रेशन के कुछ दिनो बाद ही उन्हें सर्टिफिकेट मिल जाएगा। इसकी एक प्रति ऑनलाइन खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण के पास पहुंच जाएगीफूड लाइसेन्स किसके लिए जरूरी है? वे सभी दुकानदार जो कोई नाश्ते का ठेला लगाता है, चाय नमकिन मिठाई या समोसे-कचौड़ी बेचता है। खुला या पैकेट वाला दूध बेचता है, या डेयरी का कारोबार करता है या फिर किराना दुकानदार, टाफी बिस्कुट आदि जो किसी खाद्य पदार्थ का खुला या पैकेट बंद की बिक्री या सेलिंग, मैन्यूफैक्चरिंग करता है तो अब उन्हें कारोबार करने से पहले केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित एक लाइसेन्स लेनी होगी। केंद्र सरकार ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत इस लाइसेन्स को अनिवार्य कर दिया है। यह भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक अधिनियम (एफएसएसएआई) फसाई अधिनियम की पालन को लेकर महकमे को मुस्तैद होना पड़ेगा। बताया जा रहा है कि जल्द ही बिना लाइसेंस खाद्य पदार्थ बेच रहे विक्रेताओं पर कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग इसके लिए ठोस कदम उठाने की तैयारी में है। लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे खाद्य पदार्थ विक्रेताओं को कार्रवाई के तहत भारी-भरकम जुर्माना या जेल तक भुगतनी पड़ सकती है।
हाल ही में स्वास्थ्य विभाग की ओर से मिलावट के खिलाफ अभियान चलाया गया था। इस दौरान कई जगह लाइसेंस मिला लेकिन कई जगह नही मिला, उन्हे जुर्माना भरवाया गया।

इस नियम व प्रावधान के अनुसार भारतीय खाद्य संरक्ष एवं मानक अधिनियम (एफएसएसएआई) की अवहेलना पर सजा एवं जुर्माने का भी प्रावधान है। इसके तहत छह माह की सजा व 5 लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है।

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