तरकुलवा थाने के पीछे स्थित, मातृत्व शिशु टीकाकरण केन्द्र के ए.एन.एम ने आत्महत्या किया-

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संवाददाता-पं. अतुल पति त्रिपाठी, देवरिया टाइम्स, देवरिया,

तरकुलवा थाने के पीछे स्थित स्वास्थ्य विभाग की मातृत्व शिशु टीकाकरण केन्द्र की महिला कर्मचारी (ए.एन.एम.) ने अज्ञात कारणो से आत्महत्या कर ली, पुलिस ने मौके पर पहुचकर शव कब्जे में लेकर शव परिक्षण हेतु भेज दिया है, उक्त घटना की स्थिति संदेहास्पद है, परन्तु वास्तविक वस्तु स्थिति जाँच के बाद ही पता चलेगी,
आपको ज्ञात हो कि, भारत में पहले आत्महत्या को अपराध की श्रेणी मे रखा गया था, परन्तु आज इसे एक मानसिक बिमारी के रूप मे जाना जाता है, एक संक्षिप्त जानकारी आपके लिए…
अंग्रेजी औपनिवेशिक काल से जुड़े डेढ़ सदी पुराने अलोकप्रिय कानून को उन्मूलित करने की दिशा में पहली बार किसी सरकार ने साहसी कदम उठाया है। सरकार के इस नूतन कानून को बनवाने में विधि आयोग की बड़ी भूमिका रही है। विधि आयोग 1971 से 2008 के दौरान अपनी कई रिपोर्टों में सरकार से आत्महत्या के प्रयास को अपराध की श्रेणी से हटाने की सिफारिश बार-बार करता रहा है। हालाँकि, 1978 में एक अवसर ऐसा भी आया, जब इस धारा को उन्मूलित करने के लिए राज्‍यसभा में एक विधेयक पारित कर दिया गया, लेकिन तब लोकसभा के भंग हो जाने के कारण दूसरे सदन से इसे पारित नहीं कराया जा सका। उसके ठीक तीन दशक उपरांत, विधि आयोग की 17 अक्‍तूबर 2008 को आयी 210वीं रिपोर्ट में भारतीय दंड संहिता की धारा 309 को खत्‍म करने के लिये सरकार से उचित कदम उठाने की सिफारिश की गयी थी। आयोग ने, धारा 309 के बारे में अपनी रिपोर्ट में कहा था कि आत्‍महत्‍या के प्रयास को मानसिक बीमारी के रूप में देखते हुए, इसके लिये सज़ा देने की बजाए इसके उपचार पर ध्‍यान केन्द्रित करना चाहिए।

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