देवरिया टाइम्स
देवरिया। हथुआ-भटनी रेललाइन परियोजना से प्रदेश सरकार ने किनारा कर लिया है। इसकी वजह किसानों द्वारा नई भूमि अर्जन अधिनियम 2013 के अनुसार वर्तमान सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा मांगना बताया जा रहा है। अब इस परियोजना के भविष्य का निर्णय पूर्वाेत्तर रेलवे को लेना है। अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार के निर्देश पर राजस्व अनुभाग के सचिव संजय गोयल ने रेलवे को स्पष्ट रूप से अवगत कराया है कि रेलवे ने स्वत: ही परियोजना आरंभ की। इसलिए रेलवे को परियोजना के औचित्य पर खुद ही निर्णय लेना होगा।

इस परियोजना को लेकर किसान दो खेमें में बंटे हैं। एक खेमा किसी भी कीमत पर परियोजना के लिए भूमि देना नहीं चाहता। वहीं दूसरा खेमा नई भूमि अर्जन अधिनियम के अनुसार वर्तमान सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा मांग रहा है। एक खेमे के नेता त्रिवेणी यादव कहते हैं कि पूर्व रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव ने अपने गांव, ससुराल, साढू व बहन के गांव को जोड़ने के लिए निजी हित में परियोजना स्वीकृत कराई। वहीं दूसरे गुट के नेता तारकेश्वरनाथ तिवारी का कहना है कि वर्तमान सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा दिए जाने पर भूमि दी जाएगी। जिला प्रशासन से वार्ता में इससे अवगत कराया जा चुका है। यदि प्रशासन वर्तमान सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा नहीं देता है तो भूमि कदापि नहीं दी जाएगी। वह तर्क देते हैं कि भूमि पर यदि एक्सप्रेस-वे, फोरलेन या दूसरी सडक परियोजनाएं बनती हैं तो इसके किनारे की भूमि का कामर्शियल उपयोग होता है। भूमि की मांग बढती है जिससे न केवल भूमि की कीमत बढ़ती है, बल्कि लोगों को आजीविका के साधन भी मुहैया होते हैं। रेलवे लाइन बिछ जाने से न केवल सडक का अस्तित्व खत्म होगा, बल्कि कई तरह की चुनौतियां पैदा होंगी। इस परियोजना से गांव दो टुकडे में बंट जाएंगे। एक तरफ से दूसरी तरफ आना-जाना आसान नहीं होगा। खेतों तक पहुंचना मुश्किल होगा। खेतों की जुताई व बुआई, फसलों की निराई-गुडाई व सिंचाई समय से नहीं हो पाएगी। किसानों की कृषि पर आधारित आजीविका छीन जाएगी। अधिकतर किसान भूमिहीन हो जाएंगे। गांवाें में भूमि की कीमत घट जाएगी, जिससे आजीविका चलाना मुश्किल हो जाएगा।
यहां होगी मुश्किल
रेलवे लाइन बिछ जाने से उसका, बेहराडाबर, कुरमौटा ठाकुर, गौनरिया, भरहेचैरा गांव के लोगों को आने-जाने में परेशानी उठानी पडेगी। पिपरा विठठल व बनकटा तिवारी गांव हर साल बाढ के पानी से घिर जाएंगे। बाढ के पानी से गांव हमेशा जलमग्न रहेंगे। जलजमाव की समस्या हमेशा बनी रहेगी।

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वर्तमान स्थिति
जिला प्रशासन के अनुसार डीएम ने अभी अवार्ड की घोषणा नहीं की है। सलेमपुर व भाटपाररानी तहसील के 14 गांवों में 12.45 किमी लंबाई में रेललाइन प्रस्तावित है। इसके लिए कुल 41.902 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। भूमि अर्जन अधिनियम 1894 की धारा 4(1)/17 का प्रकाशन चार अगस्त 2008 को हो चुका है। धारा 6(1)/17 का प्रकाशन सात नवंबर 2010 को हुआ। बिना मुआवजा भुगतान किए 20 दिसंबर 2012 को अभिलेखीय कब्जा रेलवे को दे दिया गया। अमल दरामद नहीं भेजा गया और न ही खतौनी में रेलवे विभाग का नाम दर्ज किया गया। भौतिक कब्जा भी नहीं लिया जा सका। भूमि पर अभी भी किसानों का कब्जा है व खतौनी में नाम है। परियोजना की लागत 230.03 करोड़ थी। अब यह लागत बढ़कर 770 करोड़ रुपये हो गई है।

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