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क्या है? प्रबोधनी एकादशी या देवउठनी एकादशी व्रत का महत्व, आप भी जानिएं-

देवरिया टाइम्स

संवाददाता-पं. अतुल पति त्रिपाठी देवरिया टाइम्स, तरकुलवा देवरिया, की विशेष लेख,

प्रबोधिनी या देवउठवनी एकादशी व्रत पर विशेष…
जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि
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हिंदू धर्म में देवउठनी या प्रबोधिनी एकादशी का बहुत बड़ा महत्व माना गया है। यह एकादशी हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। इस बार यह दिन शुक्रवार, यानी 8 नवंबर को पड़ रहा है। इस दिन भगवान विष्णु और लक्ष्मी के साथ तुलसी की पूजा करने का भी विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवउठनी या प्रबोधिनी एकादशी के दिन श्री हरी चार महीने के शयनकाल के बाद निद्रा से जागते जाते हैं।



इस वर्ष देवउठनी या प्रबोधिनी एकादशी व्रत का मुहूर्त- 7 नवंबर 2019 प्रात: 09:55 से 8 नवंबर 2019 को रात 12:24 तक रहेगा।
प्रबोधिनी एकादशी पूजा की विधि- इस दिन पूजा स्थल को साफ करके सांयकाल में वहां पिसे हुए चावल व हल्दी के घोल से ऐपन (एक प्रकार की रंगोली या चौक पूरना) बनाएं। साथ ही घी के 11 दीपक देवताओं को निमित्त करते हुए जलाएं।




द्राक्ष,ईख,अनार,केला,सिंघाड़ा, लड्डू, पतासे, मूली आदि मौसमी ऋतुफल इत्यादि पूजा सामग्री के साथ ही रख दें। यह सब श्रद्धापूर्वक श्री हरि को अर्पण करने से व्यक्ति पर उनकी कृपा सदैव बनी रहती है।
मंत्रोच्चारण
भगवान लक्ष्मी नारायण को जगाने के लिए इन मंत्रों का उच्चारण करना चाहिए-




उत्तिष्ठ गोविन्द त्यज निद्रां जगत्पतये। त्वयि सुप्ते जगन्नाथ जगत् सुप्तं भवेदिदम्॥
उत्थिते चेष्टते सर्वमुत्तिष्ठोत्तिष्ठ माधव। गतामेघा वियच्चैव निर्मलं निर्मलादिशः॥
शारदानि च पुष्पाणि गृहाण मम् केशव।
ऊँ श्री लक्ष्मी नारायणाय नमः

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